Thursday, March 4, 2010

IDEAS TO HELP IMPLEMENT RTE


NCERT Committee Says One Body Should Oversee Education

Akshaya Mukul TNN

New Delhi: Road marshals drawn from NCC and NSS to help children cross roads to and from schools, arranging birth certificates for all children in schools and an incentive for children who identify out-of-school kids are some of the big-ticket recommendations by an NCERT appointed committee to develop a framework for implementation of the Right to Education Act in Delhi.


Delhi government has been asked to waive off stamp duty on the affidavit regarding date of birth of the child to be submitted to the school for admission. The committee, said Delhi government, should authorize the head of the school to attest the affidavit.


The committee also recommended that school education in the Capital should be managed by one unified body. As of now, schools in Delhi are managed by MCD, NDMC and Delhi government.


The committee, headed by lawyer-activist Ashok Aggarwal, said the proposed body should also give approval to all proposed academic changes, such as of textbooks, pattern of evaluation, medium of instruction etc. it should also be consulted for closing down any school.


HRD minister Kapil Sibal might have wanted that private schools recognized under the RTE Act be spared of giving government school salaries but the committee has recommended protection of state salaries for teachers in private schools recognized under RTE Act. In exceptional cases, it said, grant-in-aid for payment of salaries of teachers could be considered.


The committee said children can be used to identify children who are for some reason not in school. An incentive of about Rs 50 could be given to children who identify a child to be brought to school. The committee has also asked for establishment of police beats (with woman police constables) at schools for girls to ensure safety and security of students.


The committee said there should be a unified website for all state and state recognized schools in Delhi with report cards and reports of a child’s progress on continuous and comprehensive evaluation supplemented with remarks of the school management committee.


To bring about a big change in the method of recruitment, the committee said the heads of schools need not be appointed by seniority alone. Therefore, it said 75% of school principals be selected through direct recruitment and only 25% through limited departmental examination.


Times of India, New Delhi
Friday, March 05, 2010

4 comments:

jansjunnessonrao said...

Dear Sir,

I have written some comments on your report at
http://spontaneousorder.in

You find more on RTE at
http://righttoeducation.in/

where we also link to this blog. Keep on working !
Jan Sj Rao

Anil Kumar said...

Good Morning Sir

I am a mother of 6 yrs child with some disability, he is studying in lKG from last two year in Ganga international school, rohini, school principal/coordinator don't want to continue in this school, they want he must have to repeat in same class or take in another school, he is growing child, is there any provision which helps us.

C.P.SHARMA said...

व्यापारिओं पर रहम करो.

अब दिल्ली के वैट विभाग ने ५८५-५९५/५.९.२०१२ नया नोटिफिकेशन जारी किया है की यदि दिल्ली से बाहर से कोई माल ख़रीदा जाता है या स्टाक ट्रान्सफर किया जाता है तो व्यापारी को उस माल की दिल्ली सीमा में माल पहुँचने से पहले कम्पूटर में ऑनलाइन निर्धारित फॉर्मेट में भरकर जमा करानी अनिवार्य है . ये नोटिफिकेशन एक अक्तूबर 2012 से लागू हो जायेगा. इस कदम से दिल्ली के व्यापारिओं खासकर जो विभिन्न कम्पनियो के डिस्ट्री बूटर हैं उनके लिये एक नई सिर दर्दी पैदा कर दी. जो बल्क में माल खरीदते हैं ओर काफी संख्या में कम्पनी के बिल होते हैं.उसे ट्रांसपोर्ट से माल उठाने से पहले ऑनलाइन डिटेल भरनी होगी. जब व्यापारी विभाग द्वारा निर्धारित 2A फॉर्मेट में सेल्लिंग डीलर की डिटेल भर कर देता है तो फिर ये नया फॉर्मेट भर कर देने की क्या जरुरत पड़ गयी. दिल्ली के अधिकतर थोक व्यापारी अन्य राज्यों से माल मंगवा कर दिल्ली में बेचते हैं.जिनमे कई ऐसे भी हैं जो सोनीपत, नॉएडा, फरीदाबाद, गुडगाँव, साहिबाबाद गाज़ियाबाद से माल मंगाते हैं ओर दिल्ली में बेचते हैं. कल्पना कीजिय एक व्यापारी दिल्ली में माल लेने आया ओर उसने कहा मुझे ये माल जल्दी चाहिए. में उसे कहूँगा की भाई पहले इस परचेज बिल की एंट्री कम्पूटर में कर लूं ओर ऑनलाइन जमा करा दूं तभी ये माल में दिल्ली से बाहर से मंगवा पाउँगा तभी आपको दे सकूँगा.. वैट डिपार्टमेंट की वेबसाइट बीजी है जब तक ये कागज़ी करवाई नहीं कर लूँगा तब माल मंगवा पाना संभव नहीं ओर तब तक में आपको डिलीवरी भी नहीं दे पाउँगा. क्या तब तक खरीददार वेबसाईट चलने का इन्तजार कर्ता रहेगा. इस तरह तो दिल्ली का व्यापारी कर चुका कारोबार. कोन नहीं जनता की रिटर्न भरने के दिनों में ही वेबसाईट कितनी बार जाम रहती है. शायद लगता है नए कमिश्नर राजेंदर कुमार जी को दिल्ली के व्यापार चोपट करने का ठेका दे दिया गया है.


राम लाल एंड कम्पनी दिल्ली में एक किर्लोस्कर पम्प कम्पनी के डिस्ट्रीबुटर हैं और वे पूना की इस कम्पनी का दिल्ली में माल बेचते हैं. अब ट्रांसपोर्ट का ट्रक माल, माल निर्माता कम्पनी से उठाकर ट्रांसपोर्ट में ला कर रख देता है. इस प्रकरण में पूना से चलने वाला ट्रक अपने ट्रांसपोर्ट के नोर्दर्न रीजन के रेवाड़ी स्टेशन पर माल उतार देता है फिर वहाँ से नया ट्रक दिल्ली-यू पी बार्डर के लिये माल लेकर चलता है ओर वहाँ माल पहुंचाता है. फिर वहाँ से डीलर टेम्पो से माल दिल्ली मार्केट के लिये मंगवाता है तो इसमें कई ट्रक बदल गए. व्यापारी कोन से ट्रक का नंबर विभाग द्वारा निर्धारित उस नए फॉर्मेट में लिखेगा .

यह बात कदाचित नहीं भूली जानी चाहिए जितनी जटिलताएं बढती जाएँगी उतना ही दिल्ली में व्यापारियो के लिये कारोबार करना मुश्किल हो जायेगा ओर वो धीरे धीरे यहाँ से खिसकने की सोचेगा ओर दिल्ली के आस पास के शहरों में अपना कारोबार शिफ्ट कर सकता है जिससे दिल्ली में व्यापार बिलकुल ख़त्म हो जायेगा ओर दिल्ली सरकार के राजस्व में भारी हानि होगी.

सी.पी. शर्मा
3128 , रानी बाग़ दिल्ली
9560883216

C.P.SHARMA said...

माननीय मुख्य मंत्री महोदय
दिल्ली सरकार दिल्ली

में इस पत्र के माध्यम से दिल्ली के लाखो व्यापारियो की मूल समस्या की तरफ आपका ध्यान दिलाना चाहता हूँ जिसकी वजह से व्यापारी वर्ग दुखी ओर परेशान है. वह व्यापार बढ़ाने ओर ज्यादा से ज्यादा कर संग्रह करके सरकार को सहयोग देने की बजाय कागज़ी करवाई में ही उलझा रहता है. अभी तक दिल्ली के व्यापारिओं के खरीददारों से वित् वर्ष 2008 -09 , 2009 -10 , 2010 -11 के सी फार्म नहीं आ पाए ओर व्यापारिओं पर जल्दी से जल्दी असेसमेंट करने का दबाव बनाया हुआ है. वर्ष 2011 -12 के फस्ट, सेकण्ड, ओर थर्ड क्वार्टर के सी फार्म ऑन लाइन जमा कराने की लास्ट डेट 30 .9 .2012 है. जब अभी तक पिछले तीन सालों के सी फार्म नहीं आये तो ११-१२ के सी फार्म इतनी जल्दी कैसे आ जायेंगे.

इस प्रकरण में सभी सी फार्मों की डिटेल कम्पुटर में भरकर ओर मिस्सिंग फार्म्स की लिस्ट भर कर जमा करानी होगी. ये जमा कराने के बाद ऑटोमेटिक असेसमेंट हो जाएगी ओर अडिशनल डिमांड भेज दी जाएगी. परिणाम स्वरूप लाखो रूपए की डिमांड के लिये अपील करनी पड़ेगी, वकील को फीस देनी पड़ेगी, स्टे के लिये हजारो/लाखों रूपए एकमुश्त राशि जमा करानी पड़ेगी. अपील कब तक पेंडिंग रहेगी कुछ नहीं कहा जा सकता तब तक व्यापारी की स्टे कन्डीशन राशि बंधक बनकर रहेगी. दुसरे राज्यों से सी फार्म मंगवाने में कितनी मशक्कत करनी पड़ती है क्योंकि वहाँ भी खरीद दार व्यापारी को डिपार्टमेंट से जल्दी सी फार्म नहीं मिलते. इस लिये प्रार्थना है की सी फार्म जमा कराने हेतु ये ऑनलाइन सिस्टम ओर डेड लाइन ख़त्म की जानि चाहिए.

अभी 16 अगस्त को विभाग की तरफ से एक नोटिफिकेशन जारी किया गया जिसमे बताया गया है की दिल्ली के हर व्यापारी को अपने माल का स्टाक वित् वर्ष खत्म होने के बाद 30 जून तक ऑनलाइन जमा कराना होगा.जिसमे आइटम,रेट, क्वानटीटी, नेट वैलु मेंशन की जाएगी. ये नया नोटिफिकेशन व्यापारी के लिये सिर दर्द साबित होगा. आखिर एक छोटी छोटी आइटम नट, बोल्ट,छल्ले, कील, बांस की छोटी छोटी पोरिओ का कैसे हिसाब रखेगा. क्या ये संभव है. जब से श्री राजेंदर कुमार जी ने दिल्ली के वैट कमिश्नर का पड़ संभाला है दिल्ली के व्यापारिओं की सिरदर्दी बढ़ी है ओर कोई भी उनकी आवाज उठाने, सुनने वाला नहीं. यहाँ तक की दिल्ली के सभी व्यापारिक संगठन सोय हुए हैं ये आपस में बंटे हुए हैं.जितना देश का आम आदमी देश भक्त है उतने ही देश के व्यापारी भी देश भक्त है. उनकी देश भक्ति पर ऊँगली नहीं उठाई जानि चाहिए. वे भी टैक्स कलेक्ट करके सरकारी खजाने में जमा करके राष्ट्र के विकास में योगदान देते हैं.

मुख्य मंत्री जी से प्रार्थना है की एक ऐसी नई व्यवस्था बनाई जानि चाहिए जिसमे.
क्वार्टर वाइज सी फार्म जमा करने की प्रक्रिया ख़त्म होनी चाहिए.
असेसमेंट वित् वर्ष ख़त्म होने के चार साल बाद होनी चाहिए तब तक सभी खरीद दारों से सी फार्म आ जाते हैं.
पिछले विवादस्पद जारी नोटिफिकेशन वापस लिये जाने चाहियें.
भविष्य में व्यापारी को परेशान/तंग करने वाले कोई नए नोटिफिकेशन जारी ना किए जायें.

धन्यवाद सहित.
चन्द्र प्रकाश शर्मा
३१२८, रानी बाग़ दिल्ली -३४